शनिवार, 5 अगस्त 2017

'चोटी कटवा,' एक रहस्य कथा!

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टीवी पर लगातार चोटी कटवा की खबरें आ रहीं हैं, न्यूज एंकर बता रहा है कि राजस्थान के नोखा कस्बे में पहली चोटी कटने के बाद से पिछले दो हफ्तों में यह 1800वां मामला है... डॉ अनुपम मानव इन सब खबरों को देखते हुए अपनी पत्नी अनुपमा और इकलौती बेटी अनुपम ज्योति के साथ डिनर ले रहे हैं... अनुपमा सशंकित भी हैं और आतंकित भी, उन्हें लम्बे बालों से बहुत प्यार है, इतना कि विवाह के बाद डॉ साहब के अनेकों बार बॉब कट अथवा शोल्डर लेंग्थ हेयर करने के रोमान्टिक अनुरोध को उन्होंने साफ मना कर दिया, बिटिया के बाल भी उन्होंने उसके तमाम अनुरोधों-जिद के बावजूद कभी भी कटवाने नहीं दिये...

मनोविज्ञान के प्रोफेसर डॉ साहब पत्नी को आश्वस्त करने के लिये उनको मनोविज्ञान और मानव मस्तिष्क के बारे में बताते हैं "दरअसल यह सब एक तरह का मास हिस्टीरिया है कुछ मामलों में, तो कुछ मामलों में यह अपने को आकर्षण का केंद्र बनाने के लिये किया जा रहा है, कुछ मामलों में यह दबी हुई इच्छा पूरी करने का प्रयास है... कुल मिलाकर मानव मस्तिष्क बहुत ही जटिल है, और कई बार उसके किसी ख़ास काम को करने के बारे में आप न तो कोई अनुमान लगा सकते हैं और न ही पूर्ण निश्चितता से कुछ कह ही सकते हैं।"

पर अनुपमा का भय कम नहीं हुआ, अनुपम ज्योति भी डरी हुईं थी, बोली "पापा मैं तो आज आप लोगों के साथ ही सोऊँगी!" तीनों डिनर के बाद छोटे वॉक पर जाते हैं और रात करीब ग्यारह बजे सो जाते हैं।

दूसरे दिन की सुबह की शुरुआत अनुपमा और अनुपम ज्योति के बिलखने से होती है, दोनों के बाल कंधों से नीचे बाल कटवा ने काट दिये हैं, डॉ साहब सन्न हैं, उनके मुख से निकलता है "कुछ बातें विज्ञान कभी नहीं समझ सकता!" फिर पत्नी और बेटी को ढाढस दे वो सैलून ले जाते हैं, बालों को तरतीब से कटवाने के लिये।

तीन दिनों के बाद रविवार पड़ा, डॉ साहब स्टडी में बैठे हैं, तभी सोलह साल की अनुपम ज्योति उनके पास जाती है, उसका सर झुका हुआ है "सॉरी पापा, अपने बाल मैंने खुद ही काटे" डॉ साहब उसकी पीठ सहलाते हैं... "दरअसल जब आप मम्मी की चोटी काट रहे थे, तब मैं जगी हुई थी!"...

कुल मिलाकर मानव मस्तिष्क बहुत ही जटिल है, और कई बार उसके किसी ख़ास काम को करने के बारे में आप न तो कोई अनुमान लगा सकते हैं और न ही पूर्ण निश्चितता से कुछ कह ही सकते हैं।

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2 टिप्‍पणियां:

  1. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, " भारतीय छात्र और पूर्ण-अंक “ , मे आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  2. डॉक्टर साहब ने मौके पर चौका मार लिया.... :-) :-) वैसे आधे से ज्यादा किस्से शायद ऐसे ही हैं... सुन्दर रचना।

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