मंगलवार, 1 अगस्त 2017

ब्लॉगिंग या फ़ेसबुक, फैसले का सस्पेंस।

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दुविधा में था काफी दिनों से, इन दोनों में से एक ही को चुनना होगा आखिरकार... कल जी कड़ा करके फैसला करने की सोची... पहला प्यार ब्लॉगिंग हेड और फ़ेसबुक टेल... जो भी आयेगा, आगे बस उसी को समय दिया जायेगा... और खुली छत में जाकर उछाल ही दिया सिक्का...

उछले सिक्के को लपक कर हथेलियों में समेटा... साँसें रुकी हुई थी और हिम्मत लापता भी, फिर भी, फैसला तो करना ही था... और जिंदगी फैसलों के एक अनवरत सिलसिले का ही तो नाम है...

तो दोस्तों हथेली खोली... और..और... यह क्या यार... बेख़याली में सिक्के की बजाय कैरम की काली गोट उछाल दिये थे अपन...

 😜



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4 टिप्‍पणियां:

  1. जीवन में ये सौदागिरी पसंद ही नहीं किसी एक को छोड़ कर एक ही चुनो , दोनों थोड़ा हो सकते है |

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  2. उथलपुथल चाहते हैं तो फेसबुक,और शांति, आराम चाहते हैं तो ब्लॉगिंग , जैसा देस वैसा भेस 😊

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  3. गेंद आपके पाले में है, जैसा खेलना चाहो!

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