रविवार, 23 जुलाई 2017

फालतू में !

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'फालतू में !'

नया शहर है मेरे लिये, कल देर शाम यों ही एक्सप्लोर करने निकला, एक बड़ी, मात्र नमकीन की दुकान दिखी तो याद आया कि नमकीन भी खरीदनी थी, दुकान बन्द करने का समय हो गया था शायद, मैंने अंदर जाकर अपने दोनों आइटम बनाना चिप्स और बादाम लच्छा खरीदे, पेमेंट कर रहा था कि दुकान मालिक अपने बेटे को बोला "भाई साहब को हींग दालमोठ टेस्ट कराओ"... और मेरे मना करते करते भी बेटे ने एक छोटी प्लेट में छोटी डिस्पोजेबल चम्मच के साथ वह नमकीन दे दी...

दोनों बाप बेटे फुर्सत में थे और मैं भी, तो यों ही बातें होने लगी, तभी मैंने नोटिस किया कि कैश काउन्टर के पीछे फूलमाला चढ़ी तस्वीर से तकरीबन सत्तर वर्षीय दुकान मालिक की सूरत हुबहू मिलती है... "आपके पिताजी की फ़ोटो है न यह?" पूछा मैंने... उसने स्वीकार में सिर हिलाया... "बड़ी पुरानी दुकान है फिर तो यह" मैं बोला... "दुकान तो उससे भी पुरानी है, दादाजी ने खोली थी, सिर्फ चौदह साल की उम्र में" उसने जवाब दिया... फिर न जाने क्यों वो बोल पड़ा "दरअसल काउन्टर पर सिर्फ़ एक फोटो की ही जगह है।"

बाहर निकलता मैं यही सोच रहा था, तब जबकि हर डिस्प्ले काउन्टर पर मात्र एक तस्वीर की ही जगह है, और दुनिया है कि मार पिले पड़ी है चूहा दौड़ में... मैं भी और आप भी !

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8 टिप्‍पणियां:

  1. कैसा स्वाद था हींग दलमोठ का
    और बादाम का लच्छा भी कभी नही खाई
    चूहों की दौड़ कैसी होती है....
    अगले अंक में तफसील से बताइएगा
    सादर

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  2. दौड़ फालतू है, जीत या हार फालतू है मगर जीवन अनमोल है। हीरे की पहचान यदि जौहरी न करे तो हीरा भी फालतू है। जानने के बाद आनन्द है, उत्सव है।

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  3. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, " स्व॰ कर्नल डा॰ लक्ष्मी सहगल जी की ५ वीं पुण्यतिथि “ , मे आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  4. आपकी लिखी रचना  "पांच लिंकों का आनन्द में" बुधवार 26 जुलाई 2017 को लिंक की गई है.................. http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!


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  5. सीख भी है ,व्यंग भी है इस लघुकथा में। और कुछ ढूंढ़ा जाय तो वह भी मिल जायेगा। इसी को कहते हैं गागर में सागर..... बहुत ख़ूब। बधाई।

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  6. @मैं तो 'काले' को 'काला' ही कहूँगा.................फिर कहने को रह ही क्या जाता है,....फालतू में :-)

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  7. वैसे तो एक फोटो की जगह भी जल्दी दूसरी फिटि से बदल जाती ही ...
    यही दस्तूर है ...

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